लेखक: प्रो. रिपु रंजन सिन्हा (लेखक लैंगबस्टेक यूनिवर्सिटी, USA के चांसलर और एशिया अफ्रीका डेवलपमेंट काउंसिल के महानिदेशक हैं) आज जब हम 2026 के पड़ाव पर खड़े हैं, भारत के सामने एक ऐतिहासिक अवसर है। स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष, यानी 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य अब केवल एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का साझा संकल्प बन चुका है। लेकिन प्रश्न यह है कि ‘विकसित’ होने का पैमाना क्या केवल $30 ट्रिलियन की जीडीपी होगी? मेरा मानना है कि एक विकसित राष्ट्र वह है जो आर्थिक महाशक्ति होने के साथ-साथ ‘नैतिक और तकनीकी महाशक्ति’ भी हो। मैंने हमेशा ‘रेड-ग्रीन मूवमेंट’ की वकालत की है। यहाँ ‘रेड’ (लाल) का अर्थ है—आधुनिक विज्ञान, एआई (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और वह आक्रामक नवाचार जो सीमाओं को तोड़ता है। वहीं ‘ग्रीन’ (हरा) का अर्थ है—सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शांति। यदि हम केवल ‘रेड’ पर ध्यान देंगे, तो हम एक मशीनी और शुष्क समाज बनाएंगे। और यदि केवल ‘ग्रीन’ की बात करेंगे, तो हम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। भारत की नियति इन दोनों के संतुलन में है। हमें अपनी प्रयोगशालाओं में तैयार होने वाले ‘पेटेंट’ को खेतों और कारखानों तक पहुँचाना होगा। एशिया और अफ्रीका के बीच बन रहे आर्थिक गलियारे (ITAEC) में भारत की भूमिका एक ‘बड़े भाई’ की नहीं, बल्कि एक ‘सहयोगी मित्र’ की है। एशिया अफ्रीका डेवलपमेंट काउंसिल (ADCO) के माध्यम से हम देख रहे हैं कि भारतीय नवाचार (जैसे UPI और सौर ऊर्जा मॉडल) अफ्रीका के विकासशील देशों के लिए एक मार्गदर्शक बन रहे हैं। विकसित भारत की राह तीन प्रमुख स्तंभों पर टिकी है, जिन्हें मैं ‘थ्री-आई’ (Three I’s) कहता हूँ: Invention (स्वदेशी आविष्कार): हमें अपनी समस्याओं का समाधान विदेशी तकनीक से नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी की मेधा से करना होगा। Integration (एकीकरण): हमारी अकादमिक प्रतिभा (Academia) और कॉर्पोरेट जगत के बीच जो ‘खाई’ है, उसे पाटना होगा। शोध केवल शोधपत्रों तक सीमित न रहे, वह ‘उत्पाद’ बने। Integrity (अखंडता): हमारा विकास समावेशी होना चाहिए। डिजिटल क्रांति का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचना अनिवार्य है। ‘जेननेक्स्ट’ (GenNext) समिट के दौरान मैंने युवाओं की आँखों में वह चमक देखी है जो दुनिया बदलने का दम रखती है। हमें एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बनाना होगा जहाँ विफलता को ‘अंत’ नहीं, बल्कि ‘सीख’ माना जाए। मेरी पुस्तक ‘डोंट किल इन्नोवेशन’ इसी विचार को समर्पित है कि डर नवाचार का सबसे बड़ा दुश्मन है। संविधान के अनुच्छेद 51 में निहित अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की भावना ही हमारे ‘विकसित भारत’ का आधार है। हम एक ऐसी महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हैं जो दुनिया पर कब्जा नहीं करती, बल्कि दुनिया का दिल जीतती है। आइए, 2047 के उस भारत का निर्माण करें जो तकनीक में ‘लाल’ की तरह प्रखर हो और स्वभाव में ‘हरे’ की तरह शांत। Post navigation Launch of Viksit Bharat 2047 Development Forum Bridging the Ancient and the Modern: A Journey into Self-Awareness