विकसित भारत विजन 2047: विकसित भारत का समग्र मिशन

लेखक: प्रो. (डॉ.) रिपु रंजन सिन्हा

जैसे-जैसे हम अमृत काल में आगे बढ़ रहे हैं, विकसित भारत 2047 की यात्रा केवल एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि भारत को फिर से विश्व गुरु और “सोने की चिड़िया 2.0” बनाने का एक राष्ट्रीय मिशन है। स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए, हमें सामान्य प्रगति से आगे बढ़कर एक समग्र, तकनीक-संचालित और समावेशी दृष्टिकोण अपनाना होगा।

1.4 अरब लोगों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और उच्च जीवन स्तर का लक्ष्य हासिल करने के लिए चार स्तंभों: युवा, गरीब, महिलाएं और अन्नदाता (किसान) के बीच तालमेल आवश्यक है।
एक विकसित भारत की शक्ति समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने में निहित है।

  • युवा: हमारी जनसांख्यिकीय शक्ति (Demographic Dividend) हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है। विकसित भारत के लिए हमें डिग्री-आधारित शिक्षा से कौशल-आधारित उत्कृष्टता की ओर बढ़ना होगा। नई शिक्षा नीति (NEP) को इंडस्ट्री 4.0 के साथ जोड़कर हमें अपने युवाओं को एआई (AI), सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे भविष्य के क्षेत्रों के लिए तैयार करना चाहिए।
  • अन्नदाता: कृषि को केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का आधार बनाना होगा। एग्री-टेक (Agri-Tech)—जैसे एआई-आधारित मृदा परीक्षण और सटीक खेती—के माध्यम से हम भारत को “विश्व की खाद्य टोकरी” बनाने के साथ-साथ ग्रामीण आय में भी भारी वृद्धि कर सकते हैं।
  • नारी शक्ति: महिलाओं की पूर्ण भागीदारी के बिना आर्थिक विकास अधूरा है। हमारा लक्ष्य महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाना और ज़मीनी स्तर के उद्यमिता से लेकर कॉर्पोरेट नेतृत्व तक महिला-नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देना है।

21वीं सदी में विकास का अर्थ तकनीकी संप्रभुता है। भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनना होगा।

  • संप्रभु एआई (Sovereign AI): हमें ऐसी एआई समाधानों की आवश्यकता है जो हमारी भाषाई, सांस्कृतिक और आर्थिक विविधताओं के अनुरूप हों। एक मजबूत राष्ट्रीय एआई बुनियादी ढांचे का निर्माण करके, हम स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए संसाधनों को सुलभ बना सकते हैं, जिससे “ग्लोबल एआई” के दौर में “भारत एआई” की पहचान बनी रहे।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): जिस तरह यूपीआई (UPI) ने भुगतान के क्षेत्र में क्रांति ला दी, उसी तरह हमारे तकनीकी तंत्र को अब स्वास्थ्य, रसद (logistics) और शासन में बदलाव लाना होगा।

एक सच्चा विकसित राष्ट्र “रेड” (औद्योगिक और तकनीकी नवाचार) और “ग्रीन” (पर्यावरण शांति और स्थिरता) के बीच संतुलन बनाता है।

  • ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition): 2047 का मार्ग ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा विस्तार और सर्कुलर इकोनॉमी से होकर गुजरता है। 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य पाने के लिए हमें आज से ही नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण और टिकाऊ विनिर्माण में नेतृत्व करना होगा।
  • बुनियादी ढांचा (Infrastructure): भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी विकास के जुड़वां इंजन हैं। हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से लेकर यूनिवर्सल 6G कनेक्टिविटी तक, हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर शहरों और “स्मार्ट गांवों” के बीच की दूरी को पाटने वाला होना चाहिए।

विकसित भारत एक वैश्विक दृष्टि है।

  • रणनीतिक व्यापार: भारत-ट्रांस अफ्रीकन इकोनॉमिक कॉरिडोर (ITAEC) जैसे मजबूत आर्थिक गलियारों की स्थापना भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
  • विकास मंच: अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मंच हमें भारतीय नवाचारों और शासन मॉडल को दुनिया भर में साझा करने की अनुमति देते हैं, जिससे हमारी वैश्विक स्थिति और मजबूत होती है।

“विकसित भारत का संकल्प एक सामूहिक संकल्प है। हर कार्य, हर नवाचार और हर नीति को इस आधार पर तौला जाना चाहिए कि वह 2047 के विजन में कितना योगदान दे रही है।”

अगला दशक निर्णायक है। नवाचार, अखंडता और समावेशिता की संस्कृति को बढ़ावा देकर, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि 2047 का भारत न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध हो, बल्कि सामाजिक रूप से उन्नत और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित भी हो। यह हमारे लिए एक लचीला, आत्मनिर्भर और वास्तव में “विकसित” भारत बनाने का क्षण है।

Author: Office of Prof. Ripu Ranjan Sinha

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